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नवरात्रि का दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी माता की कथा

Published on March 14, 2023 by Editor

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है

Maa Brahmacharini Aarti 2023

माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

Table of Contents

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  • ब्रह्मचारिणी का अर्थ, ब्रह्मचारिणी माता की कथा
  • ब्रह्मचारिणी स्तोत्र
  • आरती  देवी  ब्रह्मचारिणी 
  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व;
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ब्रह्मचारिणी का अर्थ, ब्रह्मचारिणी माता की कथा

ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। यह दुर्गा माता की दूसरी शक्ति है, यह देवी अपने और दाहिने हाथ में जप की माला रखती हैं और बाएं हाथ में उनका कमंडल रखती हैं।पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।

कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।

मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है।

ब्रह्मचारिणी स्तोत्र

तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

आरती  देवी  ब्रह्मचारिणी 

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो ​तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व;

  • मां दुर्गा का ये दूसरा स्वरूप भक्तों को शुभ और अनंत फल देने वाला है।
  • मां ब्रह्मचारिणी का पूजन करने से अहंकार, लोभ, क्रोध, आलस्य, स्वार्थ और ईर्ष्या जैसी दुष्प्रवृत्तियां दूर हो जाती हैं।
  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में लाल रंग का उपयोग करने पर घर में सुख-शांति आती है।
  • नौ दिन देवी की सुबह-शाम पूजा और आरती करने से वह बहुत खुश होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।
  • इन 9 दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इसके साथ ही माता रानी की प्रिय वस्तु उन्हें अर्पित करना चाहिए।
  • देवी ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग पंचामृत है. साथ ही उनका प्रिय फूल बरगद के पेड़ का पुष्प है.

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