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हनुमान जी के तीन पिता कौन कौन थे?

Published on November 25, 2023 by Editor

हनुमानजी के तीन पिता के रूप में तीन नाम प्रस्तुत किए गए हैं। पहले नाम है माता अंजना के पति केशरी, जो कि वानर राजा केशरी थे। दूसरा नाम है माता के पति पवन, जो हवा का देवता थे। और तीसरा नाम है माता के पति श्री शंकर, जो भगवान शिव के रूप में जाने जाते हैं

कथाएँ

हनुमान जी के विषय में बात करते समय, उनके पितृत्व का सवाल हमेशा ही रहा है। हालांकि, इस विषय पर कई रूपों में मतभेद हैं और प्रमाणों में भिन्नता है। एक कहानी के अनुसार, हनुमानजी के माता-पिता के रूप में माता अंजना और उनके पति केशरी थे।माता अंजना का जन्म राजा केशरी के घर हुआ था। राजा केशरी वानर राजा थे और उन्होंने अपनी पत्नी को अपने घर की प्रजा से दूर रखा था क्योंकि वह एक वानर राजकुमारी थी। वे भगवान शिव के भक्त थे और शिवजी से बड़ी भक्ति रखते थे। एक दिन वे शिवजी के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति के लिए तपस्या कर रहे थे और उन्हें वरदान मिला कि वे शिवजी के आश्रम में जन्म लेंगी। अंजना ने शिवजी की कृपा से उनका आश्रम प्राप्त किया और वहां तपस्या करते समय उन्हें वायु पुत्र हनुमान का जन्म हुआ।

दूसरी कथा के अनुसार, माता अंजना के पति का नाम पवन था, जो हवा के देवता थे। पवन पुत्र हनुमान को जन्म देने के पहले, वे एक तपस्वी ब्रह्मचारी थे। वायु देवता ने उन्हें उनकी तपस्या के दौरान ध्यान में व्याप्त किया और हनुमान को जन्म दिया।

तीसरी कथा के अनुसार, हनुमानजी के पिता भगवान शिव थे। यह कथा भी बहुत प्रसिद्ध है और इसमें कहा जाता है कि हनुमानजी का जन्म भगवान शिव के आश्रम में हुआ था।

ये तीनों कथाएँ हनुमानजी के पितृत्व को लेकर हैं, और इनमें से कोई भी सत्यता हो सकती है या फिर इसके पीछे कोई और गहराई छुपी हो सकती है। हिंदू धर्म में, हनुमानजी को हनुमान चालीसा, रामायण और महाभारत जैसी अनेक कथाओं और वृत्तांतों में भगवान राम के भक्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

 

  • हनुमानजी का जन्म और उनके पितृत्व के विषय में कई विश्वास हैं और इसे लेकर अनेक मान्यताएं जुड़ी हैं। यह भक्ति और धार्मिक मान्यताओं पर निर्भर करता है कि किस कथा को किसी विश्वास में लिया जाए।
    हनुमानजी को भगवान राम के एक विशेष भक्त के रूप में भी जाना जाता है। रामायण में हनुमानजी की महत्ता और उनकी वफादारी को बहुत विस्तार से दर्शाया गया है। उन्होंने भगवान राम की सेवा में अपना सब कुछ समर्पित किया और उन्हें सदैव प्रिय बनाया।हनुमानजी की पूजा और उनके गुणों में विश्वास को स्थापित करने के लिए, लोग उन्हें विभिन्न रूपों में पूजते हैं, जैसे कि हनुमान चालीसा का पाठ करना, उनके मंदिरों में जाना, और उनकी भक्ति में लीन होना।
  • हनुमानजी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए, लोग मंदिरों में जाते हैं, उनकी कथाएं सुनते हैं, और उनके जीवन से जुड़ी किताबें पढ़ते हैं। वे भक्ति और समर्पण का प्रतीक हैं और उन्हें अनेक लोग मानते हैं कि हनुमानजी की कृपा से सभी संकटों का निवारण हो सकता है।
  • इस तरह, हनुमानजी के पितृत्व के विषय में कई कथाएं और मान्यताएं हैं, जो उनकी महत्ता और प्रासंगिकता को बयां करती हैं। इससे प्रकट होता है कि हर कथा अपनी अहमियत और मान्यता रखती है, और उन्हें उसी भावना और आस्था के साथ स्वीकार किया जाता है।कथाओं और विश्वासों के संदर्भ में, हनुमानजी के पितृत्व की विश्वसनीयता या निर्धारितता की दृष्टि से विवाद भी रहा है। हालांकि, यह स्वीकार किया जाता है कि हनुमानजी एक अद्वितीय और महान पौराणिक पात्र हैं जिनका जीवन और कार्य विशेष गुणों से भरा हुआ है।
  • उन्हें भगवान राम की भक्ति, वीरता, और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपनी अद्भुत सामर्थ्य और बुद्धिमत्ता के कारण अनेक कठिनाइयों को पार किया और भगवान राम की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।
  • हनुमानजी की कथाएं और उनके गुण, संकट मोचन के रूप में उन्हें जाने जाते हैं। उनके पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों में विश्वास करने वाले लोग उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के संयोग से जन्मा मानते हैं। वे वीर और भक्ति के प्रतीक के रूप में माने जाते हैं जिन्होंने अपनी असीम सेवा, साहस, और निष्ठा के कारण जन्म-जन्मांतरों तक लोगों के मन में बसे हैं।
  • हनुमानजी के प्रति भक्ति और समर्पण एक अनूठी भावना का प्रतीक है। उनकी पूजा, आराधना, और कथाएं उनके भक्तों के जीवन में साहस, शक्ति, और आनंद को लेकर एक सांस्कृतिक संबंध बनाती हैं।
  • हर किसी ने अपनी अपनी दृष्टि से हनुमानजी को देवता, एक महान भक्त, योद्धा, या फिर दिव्य पात्र के रूप में माना है। उनकी भक्ति में आत्मा का एक नया आयाम और समृद्धि की अनुभूति होती है। उनके गुणों और कथाओं के माध्यम से, लोग उनकी प्रेरणा, साहस, और निःस्वार्थ सेवा को अपने जीवन में उतारते हैं।
  • हनुमानजी के पितृत्व के बारे में बहुत से विचार हैं, लेकिन इससे अधिक महत्त्वपूर्ण है कि उनकी महानता, भक्ति, और सेवा को समझा जाए जो हर व्यक्ति के जीवन में सर्वोत्तमता और आदर्श की ओर ले जाता है।

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